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    NASA की SOFIA ने खोज निकाला चांद पर पानी

    NASA की SOFIA ने खोज निकाला चांद पर पानी



          NASA की खगोला वेधशाला सोफिया- SOFIA (Stratospheric Observatory for Infrared Astronomy)  ने पहली बार यह कन्‍फर्म किया है कि चांद की चमकीली सतह पर भी पानी के कण मौजूद हैं। इस खोज से चन्‍द्रयान-1 द्वारा चन्‍द्रमा की सतह पर पानी मिलने सम्‍बन्‍धी दावों की भी पुष्टि हो रही है।  


    कहां की गयी है यह खोज ?

                    सोफिया ने चांद के क्‍लेवियस क्रेटर पर जल के अणुओं की खोज की है। क्‍लेवियस क्रेटर चांद का दक्षिणी ध्रुव पर स्थित सबसे बड़ा क्रेटर है और पृथ्‍वी से भी दिखायी देता है। इससे पहले चांद पर पानी की खोज के लिए किये गये प्रयासों में आंशिक सफलता ही मिली थी। दरअसल पूर्व में मिले साक्ष्‍यों से हाइड्रोजन के कुछ अंशों का पता चला था लेकिन यह पता नहीं चल पाया था कि यह जल (H2O) है या जल का नजदीकी केमिकल हाइड्रोक्सिल (OH) 


    कितनी मात्रा में मिला है पानी ?

              सतह से मिले डाटा से पता चला है कि जल का घनत्‍व यहां पर 100 से 412 पी0पी0एम0 - Parts Per Million है  यानी अनुमात: चांद की सतह की एक घन मीटर मिट्टी में से 12 औंस की पानी की बोतल भरी जा सकती है । यह नतीजे नेचर एस्‍ट्रोनॉमी के इस महीने के अंक में प्रकाशित हुए हैं। 

           अगर तुलनात्‍मक रूप से देखें तो पृथ्‍वी के सर्वाधिक सूखे क्षेत्रों में से एक सहारा रेगिस्‍तान के धरातल पर पानी का घनत्‍व चांद की सतह पर मौजूद पानी कणों का 100 गुना है। इस लिहाज से यह पानी की मात्रा ज्‍यादा नहीं है लेकिन इस खोज ने कई नये सवालों को जन्‍म दिया है जैसे कि पानी का निर्माण कैसे हुआ और ऐसी वायुविहीन दशा में पानी अब तक मौजूद कैसे है?

     


    सोफिया क्‍या है?

                   सोफिया-SOFIA (Stratospheric Observatory for Infrared Astronomy) नासा और जर्मन ऐरोस्‍पेस एजेंसी का Joint Project है। यह एक खगोल दूरबीन है जो Infra Red Rays का प्रयोग करती है। यह 747SP बोइंग एयरक्राफ्ट पर स्‍थापित की गई है और धरातल से 45000 फीट की ऊंचाई पर रहकर अपना काम कर रही है। इस आब्‍जर्वेटरी में Faint Object Infra-Red कैमरा लगे हुए हैं जो 6.1 माइक्रॉन तक की तरंगदैर्ध्‍य का अध्‍ययन करने में सक्षम है। इसका Operation & Maintenance NASA की आर्मस्‍ट्रॉंग फ्लाइट रिसर्च सेण्‍टर द्वारा किया जा रहा है।

    क्‍या ये खोज पहली बार हुई है?

            सोफिया की यह खोज वर्षों से चली आ रही रिसर्च का ही एक अगला भाग है। अपोलो के 1969 अभियान और पिछले कुछ वर्षों में हुए लूनर मिशन / चन्‍द्र अभियान इस दिशा में अपना अपना योगदान दे चुके हैं। लूनर क्रेटर ऑब्‍जर्वेशन ने चन्‍द्रमा के ध्रुवों पर बर्फ जमी होने के संकेत दिये थे। इसके अलावा कैसिनी तथा भारत के चन्‍द्रयान-। ने भी चन्‍द्रमा की चमकीली सतह पर हाइड्रोजन के तत्‍वों के बारे में जानकारी दी थी लेकिन ये सब मिशन यह भेद नहीं कर पाये कि जो चन्‍द्रमा की सतह पर अवयव है वो जल-H2Oहै अथवा OH । 


    NASA के खगोल भौतिकी प्रमुख पॉल हर्ट्ज कहते हैं कि हमारे पास जो आंकड़े अभी तक आये हैं वे यह दर्शाने को पर्याप्‍त हैं कि चांद की सनलिट (सूरज की रोशनी से चमकने वाली) सतह पर पानी है। इस खोज ने हमारी अब तक हुई खोज को एक नयी दिशा दी है और यह बताती है कि अभी हमारा और कितना काम करना बाकी है।

           पृथ्‍वी से बाहर अन्‍तरिक्ष में जीवन की खोज के लिए जो भी प्रयास किये जा रहे हैं उनमें पानी भी एक महत्‍वपूर्ण फैक्‍टर है। हांलांकि सोफिया द्वारा खोजा गया पानी पीने योग्‍य है अथवा नहीं तथा किस प्रकार इस जल का प्रयोग किया जा सकता है यह बता पाना अभी संभव नहीं है।

     इस लेख को पूरा पढ़ने के लिए आपका धन्‍यवाद ।

    Source : Official Website of NASA

     

     



     

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