कोरोना वायरस का कहर-एक महामारी की शुरूआत
कोरोना वायरस का कहर-एक महामारी की शुरूआत
चीन में कोरोना वायरस के कहर से मरने वालों की
संख्या 400 को पार कर गई है. अब तक 22
देशों में इसके संक्रमण के करीब 11800 मामले
सामने आए हैं । विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे इमर्जेंसी घोषित कर चुका है।
भारत में भी अब तक इसके दो मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए इसे
फैलने से रोकना एक बड़ी चुनौती बन गई है। हालांकि, चीन इसे
रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। दुनिया भर में कोरोना वायरस के केस
लगातार सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लूएचओ ने कोरोना वायरस को
अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है।
क्या है कोरोना वायरस?
कोरोना वायरस (सीओवी) का संबंध वायरस के ऐसे
परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में
तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है । इस वायरस
का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था। डब्लूएचओ के मुताबिक,
बुखार, खांसी, सांस लेने
में तकलीफ इसके लक्षण हैं। अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं
बना है।
क्या हैं इस बीमारी के लक्षण?
इस
रोग से ग्रसित मरीज़ों के फेफड़े में तकलीफ़ थी और फेफड़े की वो जगह, जहां से
ऑक्सिजन रक्त में प्रवाह जाता है वहां पानी भर हुआ था । इसके अलावा इस वायरस से
ग्रसित होने वाले मरीज बुखार, खांसी,
सांस की तकलीफ़ से जूझ रहे थे । साथ ही उनमें
मांसपेशियों में दर्द, भ्रम होने और सर दर्द की शिकायत भी
पायी गयी।
किस
प्रकार के लोगों पर इसका खतरा अधिक?
कम
प्रतिरोधक क्षमता और पुरूष रोगी ?
मरीज़ों में ज़्यादातर लोगों को पहले से कोई न कोई
बीमारी थी। इस वजह से कोरोना से संक्रमित होने का ख़तरा उनमें ज़्यादा था। डॉक्टर
इसे कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता का नतीजा बता रहे हैं। इस रोग की वजह से जान गवांने
वाले मरीज़ों का दिल कमज़ोर था या फिर रक्त वाहिनी में समस्या थी। उन्हें हृदय रोग
था, पहले दिल के दौरे पड़ चुके थे। साथ ही कुछ को मधुमेह की समस्या भी थी।
चीन और बाकी दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा ?
चीन में
इस वायरस के चलते पर्यटकों की संख्या घट सकती है। इसका सीधा असर चीन की
अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। पहले ही चीन की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर में है। कई
देशों ने अपने नागरिकों से कोरोना प्रभावित वुहान नहीं जाने के लिए कहा है। कई
देशों ने वुहान से आने वाले लोगों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। रूस ने चीन के साथ
अपने पूर्वी बॉर्डर को भी बंद कर दिया है। आज से लगभग 18 साल पहले सार्स वायरस से भी ऐसा ही खतरा बना था। 2002-03
में सार्स की वजह से पूरी दुनिया में 700 से
ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। पूरी दुनिया में हजारों लोग इससे संक्रमित हुए थे।
इसका असर आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ा था।
चीन
में ही क्यों अधिकांशत: बीमारियां फैलती हैं?
सच्चाई तो यह है कि चीन
में कुछ जानवरों को उनके स्वाद की वजह से खाया जाता है । वहीं,
कुछ जानवरों का इस्तेमाल पारंपरिक दवाओं में किया जाता है । चीन के
अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे रेस्त्रां हैं जहां पर बैट सूप यानी चमगादड़ का सूप
परोसा जाता है । इन सूप के कटोरों में आपको एक साबुत चमगादड़ मिलता है ।
ये
येवै सूप का क्या मामला है?
चीन में जानवरों के व्यापार पर जांच
करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था से जुड़े एक इंवेस्टिगेटर बताते हैं, "चीन में 'येवै' का विचार (चीनी भाषा में इस शब्द का अनुवाद
जंगली टेस्ट होता है) घर-घर में बोला जाने वाला टर्म है जो कि चीन में सांस्कृतिक
रूप से एडवेंचर, साहस, खोजी प्रकृति और
विशेषाधिकार को बताता है। "
जानवरों के अंगों से बनी पारंपरिक
चीनी दवाओं के इस्तेमाल को लेकर माना जाता है कि जानवरों के अंगों में कई
बीमारियां जैसे कि पुरुष नपुंसकता,
आर्थराइटिस और गठिया जैसे रोगों को दूर करने की क्षमता होती है
। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़,
इस वायरस के प्राथमिक स्रोत चमगादड़ हो सकते हैं । ये भी कहा जा रहा है कि ये वायरस इंसानों में
आने से पहले किसी अन्य जानवर में गया होगा, जिसकी पहचान अब
तक नहीं की जा सकी है ।
पर्यावरण प्रेमियों के
लिए एक सुनहरा अवसर?
चीन में जानवरों के
व्यापार को लेकर जांच करने वाली संस्था इन्वॉयरनमेंट इंवेस्टिगेशन एजेंसी से जुड़े
डेबी बैंक्स बताते हैं, "इस इसे एक अवसर के रूप में देखते हैं जिससे वन्य जीवों के पालन, प्रजनन, पालतू बनाए जाने और मांस के साथ-साथ औषधीय
गुणों के लिए भी इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा सके।"
विशेषज्ञ मानते हैं
कि एविएन इंफ्लूएंजा और बर्ड फ़्लू की वजह से कई जंगली पक्षियों की प्रजातियों के
संरक्षण में मदद मिली है। विशेषज्ञ हाथियों को विलुप्तीकरण से बचाने के
अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से चीन में लगाए गए हाथी दांत पर प्रतिबंध को एक सफलता
के रूप में देखते हैं। उनके मुताबिक़,
चीन जंगली जानवरों और उनके शरीर के अंगों का सबसे बड़ा बाज़ार है,
ऐसे में वह ऐसे प्रतिबंध का लागू करके इस मुहीम का नेतृत्व कर सकता
है । लेकिन जानवरों से जुड़े उत्पादों पर नियमन और प्रतिबंध सिर्फ चीन नहीं
वैश्विक स्तर पर लगना जरूरी है।
अब तक
इस मामले में चीन ने क्या किया ?
चीन की तीन सरकारी संस्थाओं ने अपने
संयुक्त बयान में कहा है, "सभी प्रजातियों के वन्य जीवों को पालने, एक स्थान से
दूसरे स्थान तक ले जाने और बेचने पर इस घोषणा से लेकर राष्ट्रीय महामारी की स्थिति
ख़त्म होने तक प्रतिबंध लगाया जाता है।"
चीन ने इसी तरह का प्रतिबंध साल 2002 में सार्स वायरस के फैलने
पर लगाया था । लेकिन संरक्षको के मुताबिक़,
इस बैन के कुछ महीनों बाद ही चीन में वन्य जीवों का व्यापार धड़ल्ले
से होने लगा ।
क्या
ये ख़तरे की घंटी है?
वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर ने अपने
बयान में कहा है, "इस स्वास्थ्य संकट को एक ख़तरे की घंटी के रूप में लिया जाना चाहिए ताकि
संकटग्रस्त जानवरों को पालतू बनाने और उनके अंगों को खाद्य पदार्थों के रूप में और
औषधीय गुणों के चलते उनके दोहन को रोका जा सके।"
क्या
चीन अब फिर से नाटक कर रहा है?
साल 2020
के सितंबर महीने में चीन जैविक विविधता सम्मेलन के नाम से एक वैश्विक बैठक आयोजित करने जा रहा है जिसमें प्राकृतिक और जैविक
संसाधनों पर चर्चा की जाएगी। बीते साल जारी हुई एक अंतर-सरकारी रिपोर्ट के
मुताबिक़, मानव इतिहास में पहली बार दस लाख प्रजातियों पर
विलुप्त होने का ख़तरा मंडरा रहा है । कोरोना वायरस के फैलने के बाद चीन के सरकारी
मीडिया में छपी संपादकीय लेख जानवरों और उनके अंगों को लेकर जारी अनिंयत्रित
व्यापार की निंदा करते नज़र आए हैं ।
क्या
चीन वन्य जीव संरक्षकों की बात सुनेगा?
क्या कोरोना वायरस के
संक्रमण से वन्यजीवों के अवैध व्यापार रोकने के लिए किए जा रहे वैश्विक प्रयासों
को बल मिलेगा और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए पैदा होने वाले ख़तरों को टाला जा सकेगा? विशेषज्ञों की मानें तो ये
बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है और ऐसा होना लगभग असंभव जान पड़ता है ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, ख़तरनाक वायरस सार्स और मर्स
भी चमगादड़ों से आए थे। लेकिन वे भी इंसानों में आने से पहले सिवेट कैट और ऊंटों
से होकर आए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के पोषण एवं
खाद्य सुरक्षा विभाग से जुड़े डॉ. बेन इमबारेक ने बीबीसी को बताया, "हम उन वन्य जीवों की
प्रजातियों के संपर्क और उनके प्राकृतिक आवास में पहुंच रहे हैं जिनका हमसे पहले
कोई संबंध नहीं था। ऐसे में हम नई
बीमारियों का सामना कर रहे हैं जो कि पहले इंसानों में नहीं देखी गई हैं । ये
बीमारियों ज्ञात वायरसों, बैक्टीरिया और परजीवियों में भी
नहीं देखी गई हैं ।"
हाल में किया गया एक विश्लेषण बताता
है कि ज़मीन पर चलने वाले हड्डीधारी वन्यजीवों की कुल 32 हज़ार प्रजातियों में से 20
फ़ीसदी प्रजातियों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में वैध और अवैध ढंग से
ख़रीदा-बेचा जा रहा है । इसका मतलब ये हुआ कि स्तनधारियों, पक्षियों,
सरीसर्पों और उभयचरों की 5,500 से ज़्यादा
प्रजातियों की ख़रीद-फरोख़्त जारी है।
दुनिया में जानवरों का अवैध व्यापार 20 अरब डॉलर का है और ये ड्रग्स,
मानव तस्करी और नक़ली सामान के बाद चौथे नंबर पर आता है। वहीं,
दुनिया भर के देशों में इस वायरस से पीड़ित होने वाले लोगों की
संख्या बढ़ती जा रही है।
वैज्ञानिकों का मानना
है कि ये वायरस चीनी शहर वुहान के समुद्री जीवों को बेचने वाले बाज़ार से निकला है
। ये बाज़ार जंगली जीवों जैसे सांप,
रैकून और साही के अवैध व्यापार के लिए चर्चित था। इन जानवरों को
पिंजड़े में रखा जाता था और इनका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों और दवाइयों के रूप में
किया जाता था। लेकिन ख़ूबे प्रांत पर
प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से इस बाज़ार पर भी प्रतिबंध लग गया है। चीन दुनिया में
जंगली जानवरों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है जहां ये व्यापार वैध और अवैध ढंग से चलाया
जाता है।
कोरोना वायरस से बचाव के तरीके?
स्वास्थ्य मंत्रालय
ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से
धोना चाहिए. अल्कोहल आधारित हैंड रब का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. खांसते और
छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्यू पेपर से ढककर रखें. जिन व्यक्तियों में
कोल्ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें. अंडे और मांस के सेवन से बचें.
जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें.
इस लेख को पूरा पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।















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